याज्ञवल्क्य सेवार्थ संस्थानम्
“वास्तविक परिवर्तन जिम्मेदारी से प्रारंभ होता है” इस विश्वास के साथ स्थापित, याज्ञवल्क्य सेवार्थ संस्थान एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित है। यह संस्थान समाज में नैतिकता, संस्कार और धार्मिक चेतना को जागृत करने के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रहा है।
संस्थान विभिन्न सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों, यज्ञ, सत्संग, प्रवचन तथा आध्यात्मिक शिविरों के माध्यम से समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास करता है। साथ ही, यह नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता और गर्व की भावना विकसित करने के लिए विशेष पहल करता है।याज्ञवल्क्य सेवा संस्थान शिक्षा, संस्कृति, धर्म, अध्यात्म, योग, आयुर्वेद तथा सामाजिक जागरूकता जैसे विविध क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाता है। शिक्षा के क्षेत्र में यह संस्था मूल्यपरक शिक्षण, व्यक्तित्व-विकास तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा के अध्ययन-प्रसार को प्रोत्साहित करती है।
सांस्कृतिक क्षेत्र में पारंपरिक कला, साहित्य, संगीत, संस्कार एवं उत्सवों के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करने का कार्य किया जाता है।
धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में जीवन-दर्शन, आचरण-शुद्धि तथा आत्मविकास पर आधारित कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। योग एवं आयुर्वेद के माध्यम से यह संस्था शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के समन्वित स्वरूप को समाज में स्थापित करने का प्रयास करती हसाथ ही, पर्यावरण संरक्षण, नारी-सशक्तिकरण, ग्राम-विकास एवं जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक सकारात्मक परिवर्तन का संदेश पहुँचाया जाता है।ै।
संस्थान समय-समय पर संगोष्ठियों, व्याख्यानमालाओं, संस्कार-शिविरों एवं सेवा-परियोजनाओं का आयोजन करता है, जिससे समाज में जागरूकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को बल मिलता हैइस प्रकार, याज्ञवल्क्य सेवा संस्थान भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के प्रति पूर्णतः समर्पित है।।
हमारा विज़न
एक ऐसे सशक्त, संस्कारित एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध समाज का निर्माण करना जो भारतीय मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना पर आधारित हो।
हमारा मिशन
भारतीय ज्ञान-परंपरा, संस्कृत भाषा, गीता-दर्शन एवं वैदिक विज्ञान के प्रचार-प्रसार के माध्यम से समाज में नैतिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जागरण को सुदृढ़ करना।
संस्थापक का संदेश
आचार्य विश्वामित्र मिश्र- संस्थापक एवं अध्यक्ष
“याज्ञवल्क्य सेवार्थ संस्थान में, हम सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की परिवर्तनकारी शक्ति में विश्वास करते हैं। मैंने इस यात्रा की शुरुआत एक संकल्प के साथ की थी—भारतीय संस्कृति, धर्म और संस्कारों को सशक्त बनाना तथा समाज में नैतिकता और आध्यात्मिक जागरूकता के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाना।
आज, मुझे गर्व है कि हम अनेक लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ने और उनके जीवन में शांति, संतुलन और उद्देश्य का संचार करने में सफल हुए हैं। यह सब आप जैसे सहयोगी और श्रद्धालु व्यक्तियों के समर्थन से संभव हो पाया है, जिनकी आस्था और सहभागिता हमारे इस मिशन को आगे बढ़ा रही है।
आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें, जहाँ संस्कृति, धर्म और मानवीय मूल्यों का संरक्षण हो, और आने वाली पीढ़ियाँ अपनी समृद्ध विरासत पर गर्व कर सकें।”
— आचार्य विश्वामित्र मिश्र
हमारा उद्देश्य
संस्कार, ज्ञान और सेवा के माध्यम से समाज का समग्र विकास
हमारा विज़न
एक ऐसे सशक्त, संस्कारित एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध समाज का निर्माण करना, जो भारतीय ज्ञान-परंपरा, नैतिक मूल्यों एवं आध्यात्मिक चेतना पर आधारित हो, तथा परंपरा और आधुनिकता के संतुलन के साथ राष्ट्र के समग्र विकास में योगदान दे।
हमारा मिशन
भारतीय ज्ञान-परंपरा, संस्कृत भाषा, गीता-दर्शन एवं वैदिक विज्ञान के प्रचार-प्रसार के माध्यम से समाज में नैतिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जागरण को सुदृढ़ करना।
- संस्कृत शिक्षण-प्रशिक्षण द्वारा भाषा का प्रसार
- श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश का जीवन में प्रयोग
- वैदिक विज्ञान एवं आयुर्वेद का प्रशिक्षण
- युवाओं का चरित्र-निर्माण एवं व्यक्तित्व-विकास
- योग एवं अध्यात्म से संतुलित जीवन
- सामाजिक सेवा एवं समरसता अभियान
- शोध, संगोष्ठी एवं ज्ञान-विस्तार
Our Leadership

प्रोफेसर शरदिंदु कुमार त्रिपाठी
संरक्षक

प्रोफेसर देवेन्द्र कुमार
संरक्षक

आचार्य विश्वामित्र मिश्र
संस्थापक एवं अध्यक्ष

आचार्य सुरेन्द्र मिश्र
सचिव
रूचि तिवारी
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, कौमारभृत्य विभाग, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, वाराणसी
डॉ. प्रियव्रत मिश्र
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, व्याकरण विभाग,
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी
डॉ. अम्बरीश मिश्र
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, व्याकरण विभाग,
कामेश्वर सिंह दरभंगा विश्वविद्यालय
श्रीश मिश्र
योजना सहायक, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, वाराणसी
डॉ. प्रदीप कुमार मिश्र
प्रत्नकीर्ति प्राच्य शोध संस्थान, वाराणसी
डॉ. उमाकान्त शुक्ल
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, व्याकरण विभाग, कामेश्वर सिंह दरभंगा विश्वविद्यालय
डॉ. पंकज कुमार सिंह
असिस्टेंट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कौमारभृत्य विभाग, NEIAH, शिलांग
अश्विनी कुमार गुप्ता
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, कौमारभृत्य विभाग,
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, वाराणसी
आचार्य विश्वामित्र मिश्र
संस्थापक एवं अध्यक्ष
याज्ञवल्क्य सेवार्थ संस्थानम्, वाराणसी
नितिन कुमार मिश्र
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, राजनीति विज्ञान
बबुआ जी पी जी कॉलेज, देवरिया
डॉ०. प्रदीप सिंह
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, कामर्स विभाग
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी
डॉ. श्रीकान्त मिश्र
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, दर्शन विभाग
महन्थकेशव संस्कृत महाविद्यालय, पटना
डॉ. अनुजा त्रिपाठी
असिस्टेंट प्रोफेसर
वसंत कन्या महाविद्यालय, वाराणसी
शिवांगी मिश्रा
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, संस्कृत विभाग
आर्य महिला महाविद्यालय, बी.एच.यू, वाराणसी
श्रेया सिंह
न्यास सदस्य
याज्ञवल्क्य सेवार्थ संस्थानम्, वाराणसी
वत्सल शर्मा
प्रभारी
याज्ञवल्क्य शिक्षा संगठन, वाराणसी
