संस्थान का परिचय
याज्ञवल्क्य सेवार्थ संस्थानम्
याज्ञवल्क्य सेवार्थ संस्थानम् एक शैक्षिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं शोधोन्मुख संस्था है, जो ज्ञान, संस्कार, भारतीय संस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्यों को केंद्र में रखते हुए समाज के सकारात्मक एवं समग्र विकास के लिए कार्यरत है।
संस्थान का विश्वास है कि वास्तविक और स्थायी परिवर्तन केवल विचारों से नहीं, बल्कि ज्ञान, जिम्मेदारी, सेवा और सक्रिय सहभागिता से संभव होता है।
भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत से प्रेरणा लेते हुए संस्थान आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप ज्ञान और संस्कृति के बीच एक सार्थक संवाद स्थापित करने का प्रयास करता है।
संस्थान एक दृष्टि में
- संस्थान का नाम याज्ञवल्क्य सेवार्थ संस्थानम्
- कार्य का स्वरूप शैक्षिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं शोध गतिविधियाँ
- प्रमुख उद्देश्य ज्ञान, संस्कृति, अनुसंधान और सामाजिक सेवा
- कार्य दर्शन ज्ञान, संस्कार, सेवा एवं उत्तरदायित्व
स्थापना एवं उद्देश्य
याज्ञवल्क्य सेवार्थ संस्थानम् की स्थापना इस विचार के साथ की गई है कि ज्ञान और शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति के बौद्धिक विकास के साथ-साथ उसके नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक व्यक्तित्व का निर्माण करना भी है।
संस्थान भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को समकालीन संदर्भों से जोड़ते हुए ऐसे शैक्षिक, अकादमिक और सामाजिक प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनसे समाज में जागरूकता, संवाद और रचनात्मक सहभागिता को बढ़ावा मिले।
संस्थान के प्रमुख उद्देश्य
शिक्षा, अध्ययन और ज्ञान आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करना तथा समाज में ज्ञान के व्यापक प्रसार के लिए कार्य करना।
भारतीय संस्कृति, परंपराओं, मूल्यों और ज्ञान विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में सार्थक पहल करना।
अनुसंधान, संगोष्ठियों, सम्मेलनों, व्याख्यानों और अकादमिक संवाद के माध्यम से ज्ञान के नए आयामों को प्रोत्साहित करना।
युवाओं, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विद्वानों को रचनात्मक एवं ज्ञान आधारित अवसरों से जोड़ना।
समाज में नैतिकता, जिम्मेदारी, सेवा और सकारात्मक नागरिक चेतना की भावना को मजबूत करना।
विभिन्न संस्थानों, विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों के साथ सहयोग एवं सहभागिता को बढ़ावा देना।
ज्ञान, संस्कृति और सेवा की दिशा में निरंतर प्रयास
शिक्षा, अनुसंधान, संस्कृति और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में हमारी सतत यात्रा।
शैक्षिक गतिविधियाँ
शिक्षा एवं ज्ञान आधारित पहल
अकादमिक कार्यक्रम
संगोष्ठियाँ, सम्मेलन एवं संवाद
प्रतिभागी एवं लाभार्थी
विद्यार्थी, युवा एवं समाज के सदस्य
सहयोगी पहल
संस्थागत एवं सामाजिक सहभागिता
प्रमुख कार्यक्षेत्र
शिक्षा एवं ज्ञान
अध्ययन, प्रशिक्षण और बौद्धिक संवाद के माध्यम से शैक्षिक विकास को प्रोत्साहित करना।
अनुसंधान
भारतीय एवं समकालीन विषयों पर अध्ययन, शोध और अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना।
संस्कृति एवं विरासत
भारतीय संस्कृति, परंपराओं और ज्ञान विरासत के संरक्षण एवं प्रसार के लिए कार्य करना।
सामाजिक सेवा
जन-जागरूकता और जनहितकारी गतिविधियों के माध्यम से समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना।
युवा सहभागिता
युवाओं को शिक्षा, शोध, नेतृत्व और सामाजिक सेवा के रचनात्मक अवसरों से जोड़ना।
अकादमिक संवाद
संगोष्ठियों, सम्मेलनों और विशेषज्ञ संवाद के माध्यम से विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
हमारी प्रतिबद्धता
याज्ञवल्क्य सेवार्थ संस्थानम् ज्ञान, संस्कृति और सेवा को केवल गतिविधियों के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखता है। संस्थान गुणवत्ता, उत्तरदायित्व, सहभागिता और सकारात्मक सोच के साथ वर्तमान एवं आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त ज्ञान और सांस्कृतिक आधारभूमि तैयार करने की दिशा में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।
हमारा मार्गदर्शक विचार
“वास्तविक परिवर्तन जिम्मेदारी से प्रारंभ होता है। जब ज्ञान के साथ संस्कार, संवेदनशीलता और सेवा की भावना जुड़ती है, तभी व्यक्ति के विकास से समाज के विकास की सार्थक यात्रा प्रारंभ होती है।”
हमारा विज़न एवं मिशन
भारतीय ज्ञान-परंपरा, वैदिक विज्ञान, शिक्षा प्रणाली, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से एक सशक्त एवं संस्कारित समाज के निर्माण की दिशा में हमारा संकल्प।
हमारा विज़न
एक ऐसे सशक्त, संस्कारित, ज्ञानसम्पन्न एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध समाज का निर्माण करना, जो भारतीय जीवन-मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना, वैदिक ज्ञान-विज्ञान तथा भारतीय शिक्षा-परंपरा से प्रेरित हो।
हमारा उद्देश्य ऐसे समाज के निर्माण की दिशा में कार्य करना है जो नैतिकता, मानवीय संवेदनाओं, ज्ञान और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर हो।
हमारा मिशन
भारतीय ज्ञान-परंपरा, संस्कृत भाषा, श्रीमद्भगवद्गीता के दर्शन, वैदिक विज्ञान तथा भारतीय शिक्षा प्रणाली के अध्ययन, अनुसंधान, संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के माध्यम से समाज में नैतिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक जागरण को सुदृढ़ करना।
शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण, संवाद और जनसहभागिता के माध्यम से भारतीय ज्ञान-विरासत तथा पारंपरिक शिक्षा-पद्धतियों के उपयोगी और प्रासंगिक तत्वों को समकालीन आवश्यकताओं से जोड़ते हुए वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए सशक्त ज्ञान-आधारित वातावरण का निर्माण करना।
संस्थापक का संदेश
आचार्य विश्वामित्र मिश्र
“याज्ञवल्क्य सेवार्थ संस्थानम् में, हम सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की परिवर्तनकारी शक्ति में विश्वास करते हैं। मैंने इस यात्रा की शुरुआत एक संकल्प के साथ की थी—भारतीय संस्कृति, धर्म और संस्कारों को सशक्त बनाना तथा समाज में नैतिकता और आध्यात्मिक जागरूकता के माध्यम से सकारात्मक बदलाव लाना।
आज, मुझे गर्व है कि हम अनेक लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ने और उनके जीवन में शांति, संतुलन और उद्देश्य का संचार करने में सफल हुए हैं। यह सब आप जैसे सहयोगी और श्रद्धालु व्यक्तियों के समर्थन से संभव हो पाया है, जिनकी आस्था और सहभागिता हमारे इस मिशन को आगे बढ़ा रही है।
आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें, जहाँ संस्कृति, धर्म और मानवीय मूल्यों का संरक्षण हो, और आने वाली पीढ़ियाँ अपनी समृद्ध विरासत पर गर्व कर सकें।”
Our Leadership

प्रोफेसर शरदिंदु कुमार त्रिपाठी
संरक्षक

प्रोफेसर देवेन्द्र कुमार
संरक्षक

आचार्य विश्वामित्र मिश्र
संस्थापक एवं अध्यक्ष

आचार्य सुरेन्द्र मिश्र
सचिव
रूचि तिवारी
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, कौमारभृत्य विभाग, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, वाराणसी
डॉ. प्रियव्रत मिश्र
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, व्याकरण विभाग,
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी
डॉ. अम्बरीश मिश्र
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, व्याकरण विभाग,
कामेश्वर सिंह दरभंगा विश्वविद्यालय
श्रीश मिश्र
योजना सहायक, राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, वाराणसी
डॉ. प्रदीप कुमार मिश्र
प्रत्नकीर्ति प्राच्य शोध संस्थान, वाराणसी
डॉ. उमाकान्त शुक्ल
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, व्याकरण विभाग, कामेश्वर सिंह दरभंगा विश्वविद्यालय
डॉ. पंकज कुमार सिंह
असिस्टेंट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, कौमारभृत्य विभाग, NEIAH, शिलांग
प्रो. श्यामदेव मिश्र
प्रोफ़ेसर, ज्योतिष विभाग
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर
डॉ नीरज तिवारी
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर,
वेद विभाग,
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ
मनीष कुमार गौरव
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, अंग्रेजी विभाग
अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ
डॉ प्रदीप पाण्डेय
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर,
संस्कृत विभाग,
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान परिषद, नई दिल्ली
डॉ चन्द्रेश उपाध्याय
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर,
वेद विभाग,
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय
मनीष कुमार गौरव
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, अंग्रेजी विभाग
अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ
अश्विनी कुमार गुप्ता
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, कौमारभृत्य विभाग,
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, वाराणसी
अश्विनी कुमार गुप्ता
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, कौमारभृत्य विभाग,
राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, वाराणसी
आचार्य विश्वामित्र मिश्र
संस्थापक एवं अध्यक्ष
याज्ञवल्क्य सेवार्थ संस्थानम्, वाराणसी
नितिन कुमार मिश्र
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, राजनीति विज्ञान
बबुआ जी पी जी कॉलेज, देवरिया
डॉ०. प्रदीप सिंह
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, कामर्स विभाग
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी
डॉ. श्रीकान्त मिश्र
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, दर्शन विभाग
महन्थकेशव संस्कृत महाविद्यालय, पटना
डॉ. अनुजा त्रिपाठी
असिस्टेंट प्रोफेसर
वसंत कन्या महाविद्यालय, वाराणसी
शिवांगी मिश्रा
असिस्टेन्ट प्रोफ़ेसर, संस्कृत विभाग
आर्य महिला महाविद्यालय, बी.एच.यू, वाराणसी
श्रेया सिंह
न्यास सदस्य
याज्ञवल्क्य सेवार्थ संस्थानम्, वाराणसी
वत्सल शर्मा
प्रभारी
याज्ञवल्क्य शिक्षा संगठन, वाराणसी
डॉo सत्येन्द्र मिश्र
शिक्षक (वेद/कर्मकाण्ड) रानी पद्मावती तारा योगतंत्र आदर्श संस्कृत महाविद्यालय शिवपुर वाराणसी
आशुतोष कुमार मिश्र
पूर्व पुस्तकालय मंत्री
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय
सूरज पटेल
प्रभारी
याज्ञवल्क्य शिक्षा संगठन, वाराणसी
मोहन दुबे
प्रधानाचार्य
राजराजेश्वरी संस्कृत पाठशाला,वाराणसीी
डॉ. सदाशिव तिवारी
संस्कृत अध्यापक
दिल्ली पब्लिक स्कूल वाराणसीी
डॉ मणिकांत मिश्र
आचार्य
श्री रामदास काठियाबाबा वेद पाठशाला, वाराणसी
डॉ वीरेन्द्र कुमार तिवारी
संस्कृत लेक्चरर
जनता इंटर कॉलेज., बुलन्दशहर
